chapter 2


देखते ही देखते  दाश्मिका अनामिका 18 वर्ष की हो जाती है और खुटुक इस समय 24 वर्ष का था

दाश्मिका अनामिका और खुटुक तीनो का सामना मंदिर मे होता है

 सभी खुटुक की मां आवाज लगाती है बेटा खुटुक
 दाश्मिका यहां नाम सुनकर अचानक हंसने लगती है और हंसते-हंसते कहती है

दाश्मिका:क्या नाम है तुम्हारा खुटुक
खुटुक : गुस्सा कर कहता है मेरा नाम असली भार्गव सूर्यवंशीी  प्रताप है

ये नाम सुनकर अचानक दाश्मिका को कुछ हो जाता है


 यह नाम सुनकर अचानक हवाएं चलकर तूफानी माहौल बन जाता है

सब लोग इधर-उधर भागने लगते हैं

एक अजीब सी आवाज आने लगती है

उन्ही हवाओं के बीच दशमिका की माला टूट जाती है

दश्मिका की बहुत गुस्से में शक्ल हो जाती है उसके सारे घाव ठीक हो जाते हैं जो माला से उसके गले मे बने थे

वो मंदिर से भाग कर आ जाती है उसे बिल्कुल भी सुकून नहीं मिल पा रहा था


 उसकी जाते ही हवाएं सब बंद हो जाती है


 अनामिका:अरे दश्मिका कहा गई
 अनामिका मंदिर की सीढी उतारते उतारते आवाज लगाती है
दश्मिका दश्मिका रुको

भार्गव: ऐसे कभी भी पूजा अधूरी छोड़ कर नहीं जाया जाता है

अनामिका: हा मगर हमारी बहन पता नही क्यों मंदिर से चली गई

भार्गव: आपको भगवान पर भरोसा है तो उन्हें कुछ नही होगा

अनामिका: ठीक हे हम पहले पूजा कर लेते है

ओर दोनो मंदिर में भगवान के सामने जाते हे हाथ जोड़ कर खड़े हो जाते हे

भार्गव: है ईश्वर हमारे भइया भाभी को जल्द से जल्द मिला दो

अनामिका पूजा करके निकलती हे

भार्गव की मां: बेटी रुको बेटी रुको रुको रुको

अनामिका रुक जाती हे

अनामिका: जी कहिए क्या हुवा

भार्गव की मां:मुझे पहचाना 

अनामिका:: जी आप कोन

भार्गव की मां: अरे देखो मुझे गौर से में हु मै तू आत्मा थी और

तभी भार्गव आकार कहते हे:"मां मां अरे मां आप यह आ गई और हम आपको इधर उधर ढूंढ रहे है आप भी पता नहीं कहा कहा चली आती है चलिए पापा अभी भी आपको ढूंढ रहे हे

मां: पर मेरी बात तो सुन वो देख वो लड़की को

भार्गव: मां चलो आप अभी

मां : तू क्यों लाया मुझे वहा से पता हे वो कोन थी वो वही फोटो वाली अनामिका थी वैसे ही आंखे वैसा ही चेहरा वैसी ही सुरीली सी आवाज उतनी ही खूबसूरत हा मगर उसने मुझे पहचाना क्यो नही

भार्गव के पिता: अरे भाई किसने तुम्हे पहचाना नहीं किसके इतने बुरे दिन आ गए

मां: अनामिका ने मुझे पहचाना नहीं

पिता: अनामिका क्या कहा तुमने अनामिका

मां:हां हां 

पिता:: कहा है वो किधर खड़ी हे इधर या उधर

मां:अरे वो वहा खड़ी हे देखो

पिता:: कहा है

मां: अरे अभी अभी तो मेने वही खड़े खड़े बात करी थी

पिता: तुमने जरूर किसी और को देखा होगा

मां:नही वहा अनामिका ही थी मुझपर यकीन नही होता तो पूछो भार्गव से

भार्गव: हा वो अनामिका ही थी मां सही कह रही है और अब आप लोग भी घर चलो ठीक

अनामिका मंदिर से घर पहुंच कर मां से पहुंचती है


मां मां दाश्मिका कहा है 
मां : हां बेटा काफी गुस्से में लग रही थी अपने कमरे में गई है
 अनामिका :ठीक है मैं जाकर देखती हूं

                  (उधर मंदिर मे )
खुटुक : मंदिर में जहां अनामिका खड़ी हुई थी वहां हाथ लगाकर कहता है की भाभी सा हमें सब याद आ चुका है

आप ही ने हमारी बहन से हमारी रक्षा की हम आपके आने का इंतजार कहीं दिनों से कर रहे थे

और आज हमारा इंतजार भी खत्म हो चुका है

जिन-जिन बातों से जिन जिन लोगों से जिन डरावनी बातों से जिनकी वजह से हम सब श्रापित थे आज  उन्हीं  डरावनी बातों का सामना करने हम दोनों भाई आ चुके हैं

             जल्द ही हम भईया को भी ढूंढ लेगे 
 उधर अनामिका दाश्मिका का दरवाजा ठोकती है
 और कहती दशमिका  

दशमिका : दरवाजा खोलकर कहती है क्या हुआ
अनामिका : तुम हमें मंदिर से लिए बिना ही आ गई
दश्मिका : गौर से देखती है अनामिका की और उसके चारों तरफ घूमती है
 और कहती है डरावनी बातें एकदम बहुत खतरनाक स्थिति में होती है दश्मिका बहुत डरावनी लग रही थी
 अनामिका :क्या...? ये तुम क्या कह रही हो
दश्मिका के पिता : चिल्ला कर कहते ये क्या है और यह क्या हालत बना रखी है तुमने
दश्मिका अचानक होश में आती है और खुद को देखते है
 अपने पापा की तरफ देखती है 




अनामिका का को देखती है और अपने कमरे मै चली जाती है  और दरवाजा जोर से लगा लेती है 

 अनामिका : दाश्मिका को क्या हो रहा है
पिता : समझ नहीं आया ये इतनी डरावनी कैसे हो सकती है खेर बेटा आप भी आराम करो ठीक है
अनामिका : जी पिता जी और अनामिका चली जाती है
पिता : इसके गले की माला कैसे निकल गई मुझे आज ही संत जी से मिलने जाना होगा 
अनामिका सोचती है :क़्या  हुआ है  दश्मिका  को  वो  इतनी  बेचैन क्यों 
हमने कभी उसे ऐसे नहीं देखा  अचानक इतना बदलाव क्यों आया दाश्मिका में 
 दशमिका: अपने कमरे  मे काले लिवास मे बैठी होती है 
बहुत गुस्सेेेेेेेेे में खुद से कहती है नहींंंंंंंंंंंंंं छोड़ेंगे हम किसी को नहीं छोड़ेगे और चिलाती है
 सीढ़ीयों से धीरे-धीरे उतरती है  
हम आ रहे है निहारिका हम आ रहे है
अंधेरे मे घर से जाती है राज महल मे
और 
महल खोलने की कोशिश करती है लाख कोशिश के बाद भी दरवाजा नहीं खुलता है 
 दश्मिका कुछ बोलती उससे ही पहले
 निहारिका कहती है: आओ दश्मिका बहुत देर कर दी तुमने आने में
 हम जानते थे तुम जरूर आओगी
दाश्मिका : हम इस महल के अंदर कैसे आये हम तुम्हे सुन पा रहे है निहारिका 
 तुम्हारी ये हालत हम से देखी नहीं जा रही है


निहारिका : डरावनी आवाज में कहती है भार्गव कहां है
दाश्मिका : हम जिसके साथ पिछले 6 सालों से रह रहे थे
वही खुटुक भार्गव है
मगर तब हम उसे पहचान नहीं पाये आज वो हमारे सामने आये थे
 निहारिका : क़्या कहा तुमने भार्गव तुम्हारे सामने थे
और अनामिका वो कहा है....
वो हमारे साथ ही रहती है
 निहारिका: लेकर आओ उसको साथ तभी हम महल से बाहर आ पाएंगे इस पहले हम कुछ नहीं कर पाएंगे


दश्मिका: नहीं लेकर आ पाएंगे उसके पास सुरक्षा कवच जिसके कारण तुम्हारी आवाज उसे तक आज तक नहीं पहुंच पाई
 निहारिका : हमने कहीं बार कोशिश की उसे बुलाने की इसकी वजह और सुरक्षा कवच था कि वह हमें सुन नहीं पाई
 किसी भी हालत में उसके पास से सुरक्षा कवच हटाओ 
 हम उसे पागल कर देंगे उसे पहले कि उसका बीता कल याद आए
दश्मिका : मगर अभिराज अभी तक कहीं नहीं मिले
निहारिका : चिल्लाते हुए अभिराज अनामिका से मिले उससे पहले उन्हें हम अनामिका से मिलना होगा ढूंढो अभिराज को जिस किसी कोने में है उन्हें यहां लेकर आओ यह तीनों हमें किसी भी हालत में चाहिए
 किसी भी हालत में
 दाश्मिका : जैसी आपकी मर्जी निहारिका  किंतु भार्गव को आपको बुलना होगा
 हमें लगता है उसे सब कुछ याद है और वह अभी राज और अनामिका को बचाने की कोशिश जरूर करेंगे अनामिका और अभिराज को बीती बातें याद नहीं होगी और इतनी आसानी से हम उसे याद भी नहीं आने देंगे अभिराज अनामिका मिले इससे पहले हमें अपना इतिहास दोहराना होगा निहारिका
 निहारिका: हम बदले की आग में सालों से जल रहे
दश्मिका : अनामिका ने हमारी सारी योजनाओं को पलटा कर रख दिया था अगर अब हम ऐसा नहीं होने देंगे हम चलते हैं निहारिका कुछ पल में सुबह हो जाएगी 
 निहारिका : ठीक है


                   अगली सुबह 
दाश्मिका बाहर से अनामिका को आवाज लगाती है
अनामिका अनामिका
अनामिका : क़्या हुवा दश्मिका
दाश्मिका :हमारे साथ चलो कहा
अनामिका :कहा
दाश्मिका :घूमने
अनामिका :अच्छा! ठीक है हम अभी आये
दोनों घोड़े पर बैठ कर निकलती है
अनामिका :वाह दाश्मिका आज तो मज़ा आ गया
दाश्मिका :मुस्कराते हुवे मन मे खुद से बोलती है मजा नहीं आगे तो चलो सजा मिलेगी तुम्हे
अनामिका :हम जा कहा रहे है
दाश्मिका : तुम चोलो तो सही आ
तभी सामने भार्गव घोड़े पर बैठे हुवे आते है
दाश्मिका : धीरे से बोलती है कमबख्त कहा से आ गए अनामिका घोड़े पर कोई टोना करती है और घोड़ा बेकाबू हो जाता है और भागने लगता है 
भागर्व :अनामिका के पीछे जाने लगते है
दाश्मिका : मंत्रो की सकती से उन्हें भटका देती है 

अनामिका :अरे इसको क़्या हो गया है कोई बचाओ दश्मिका अनामिका चिलाती हुई जाती है बचाओ कोई बचाओ
( महल में निहारिका की आँखे महल के दरवाजे पर ही होती है की ये दरवाजा जल्द ही खुले उसकी पूरी कोशिश होती है कि अनामिका उसके पास पहुंच जाए
आओ... आओ....अनामिका चिल्ला कर पुकारती है तुम्हे आना होगा अनामिका आ.... जाओ......
अनामिका गिर कर बेहोस हो जाती है 
वो जैसे ही होश में आती है सामने सीढिया होती है
अनामिका ये हम कहा आ गये आवाज लगाती कोई है हमारी मदद करो
अनामिका आगे बढ़ने लगती है अचानक उसके सामने कोई आ कर गायब हो जाता है
अनामिका घबरा जाती है
अरे घोड़ा तो महल के दरवाजे पर खड़ा है 
अनामिका उस घोड़े को लेने जाती है जैसे जैसे वो आगे बढ़ती है उसे,
कुछ धुंधली तस्वीर आंखों के सामने आती है महल कि तरफ बड़ी गौर से देखती है अनामिका खुद से कहती है ऐसा क्यों लग रहा है कि हम पहले भी यहां आए और जैसे ही दरवाजे को छुथी है दरवाज़ा खुल जाता है अनामिका को देख कर निहारिका खुद पर काबू नहीं रख पाई उसपर हमला करती है 

 जैसे-जैसे अनामिका कदम बढ़ाती है वैसे-वैसे उसे कुछ-कुछ चीज ऐसी दिखाई देती है जैसे उसे कुछ याद आ रहा हो वह अंदर महल मे जहाँ निहारिका को जली वही जाकर खड़ी हो जाती 
  कितना डरावना लग रहा है अंदर जाती है अचानक उसके सामने एक जलती हुई लड़की आ जाती है


 अनामिका वह देखकर चीख पड़ती है और वहां से भागने लगती है जैसे ही वह दरवाजे की ओर जाती है दरवाजा अपने आप बंद हो जाता है अनामिका चिल्लाती है खोलो दरवाजा खोलो कोई दरवाजा खोलो
( तभी निहारिका अनामिका को पकड़ने की कोशिश करती है)
 मगर वहां से छू नही पाती है और झटका खाकर पीछे गिर जाती है अनामिका को बार बार पकड़ने की कोशिश करती है 
 निहारिका चिल्लाती यह क्या हुआ मुझे यह क्या है और उसकी नजर अनामिका के गले में पड़ी माला पर पड़ती है
 निहारिका सोचती है जब तक यह माना इसके गले में है तब तक यह ना तो मुझे सुन सकती है और ना ही मैं उसे कोई नुकसान पहुंचा सकती हूं और गुस्से में ऊपर चली जाती है
 दरवाजा खुल जाता है
 दरवाजा के सामने एक युवक होता है
 जैसी दरवाजा खुलता है अनामिका उस तरफ दौड़ती है
 अनामिका को देखकर वहां युवक उसको देखते रह जाता है अनामिका भी उसकी तरफ देखती रह जाती है अनामिका इस युवक को देखकर अपना डर वहम सब भूल जाती है
 दोनों एक से एक दूसरे की तरफ देखते रहते हैं
 निहारिका सब ऊपर से देख रही होती है
 निहारिका खुद से कहती है : कहीं यही तो राजा अभिराज नहीं
 अनामिका और युवक के बीच में अचानक आग लग जाती है
 अनामिका घबराकर कहती है आग आग 
 युवक जो अभी भी उसे ही देखे जा रहा था उसे होश ही नहीं की आग लग रही है
अनामिका : अनामिका जो आग दूसरी तरफ खड़ी थी चिल्ला रही थी की आग आग
 अनामिका चिल्लाकर:
 तुम्हें क्या हो गया है बचाओ हमें यहां आग लग रही है और कूदने लगती है 
 युवक होश में आता है और कहता है : अचानक अरे यहां कैसे लग गई
 अनामिका :उसे बाद में पता करना की आग कैसे लगी  पहले हमें बचाओ 
 युवक :ठीक है ठीक है ब ब...बा बचाता हूं
 अनामिका: जल्दी करो
 युवक :अनामिका को गोद में उठाते हैं और आग खुद ब खुद बुझ जाती है
 दोनों नीचे देखते हैं कि आग  बुझ गई है 
 युवक अनामिका को धीरे से उतारते हैं
 अचानक युवक पर  हमला होता है
 अनामिका कहती है :हम यहां महल ठीक नहीं लग रहा हमें यहां से निकलना चाहिए
 चलिए यहां से युवक को कहती है और दोनों
भागते हैं भागते-भागतेे  दोनों महल के बाहर आते हैं  


 युवक पीछे देखता है तो उसे एक साया दिखाई देता है जो बड़ा ही खतरनाक दिखाई देता 
/////////////////////////////////////////////////////////////////
 कौन था ये युवक?
और उसने अनामिका की मदद क्यों की ?
अनामिका को देख ये युवक उसकी तरफ आकर्षित क्यों हो रहा था
  ऐसे आगे की कहानी जाने ch =3 pocket fm पर 

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट