chapter 1

  एक रात बहुत बडा तमाशा हुआ चार लोगो का परिवार बैठे खाना खा रहे थे खाना खा ही रहे थे की अचानक लाइट चली गई 
लाइट जाने पर ही सब खाते हुये रूक गये |
 
पिता ने कहा :"अरे ये लाइट क्यों बन्द हो गई क्या हुआ है "
 
माता ने कहा : "इस लाइट को खाना खाते वक्त ही जाना था"
 
बेटा खुटुक कहता है :"हो हो  ये क्या हो गया "
 
बेटी दाशमिका कहती: "ओ.... शश....."
 
फिर उस घर मै एक आवाज़ आती है !
 
एक बहुत खूबसूरत तस्वीर से आवाज आती हैं जो  बहुत ही सुरीली आवाज होती है   
 
          "दाश्मिका.............
सब डरकर हैरानी से देखते हैं                                          इधर उधर  देखते हैं फिर 
एक दुसरे को और सब 
पास पास हो जाते हैं 
हाथ पकड लेते हैं एक दुसरे के
             तभी 
 
दाशमिका कहती है :"कोन है?  कोन डरा रहा है हमें ,
कोई भुत हो क्या"
अगर हा तो मेरे सामने आओ ; मुझे भी तुम्ही को देखना है, इतनी बडी हो गई  हु मै, तुम्हारी बदौलत ;
 
 
पिता : (उसकी तरफ देख कर डर कर कहने लगे)अरे छोरी बाबरी हो गई है क्या किसे बात कर रही है ?
तेरा दिमाग तो खराब नही है 
 (पिता का हाथ छुडा कर दाशमिका तस्वीर के पास आ जाती है )
बाकी सब कहते है वह मत जाऔ दाश्मिका 
 
दाशमिका :(तस्वीर से कहती नफरत से )बडी ही खुबसुरत तस्वीर हैं आपकी तो (ओर वही कुर्सी पर बैठकर कहती है )
 
खुटुक :(डरते हुये)माँ  दीदी किसे से बात कर रही है 
 
मां: उसकी की तरफ देखती है और कहती है भगवान इसका दिमाग़ सर्किट हो गया है
 
माँ : इशारे से कहती है श.... श श श बेटा डरते हुई इधर आ जा मेरी माँ आजा 
 दाश्मिका नहीं सुनती है
 
दाशमिक:गुस्से से'अरे बात करनी है,(चिलाते हुवे )आओ न,मै तो आपको जानती हु,
 आ जाइये सामने
मै आपके ही लिये तो यहां आई हूं
आ जाइये सामने
महारानी अनामिका 
(दाशमिका जोर से हंसते हुए  )
हा हा हा..... 
एक आत्मा एक इन्सान के समाने आने से क्यो डर रही हैं 
बहुत डर लग रहा है क्या महारानी अनामिका 
पिता:आखिर कौन थी ये अनामिका?
क्यों दाश्मिका उस तस्वीर से बात कर रही है? आखिर ये अनामिका थी कौन?
 
एक बहुत सुरीली आवाज आती है
जैसे तस्वीर कुछ कहे रही हो 
तस्वीर : हमे आजाद करो हमको छोड़ दो दाश्मिका|
 
 
 
दाशमिका :(चिल्लाते हुऐ )इतनी आसानी से छोड दु तुम्हें नही कभी नहीं अनामिका 
तुमने हमारे सब किये कराये पर पानी  फेर दिया था
 
 
और तुम आजादी मांग रही हो नही बिल्कुल नही 
(इतराते हुये और डाराते हुये धीरे से तस्वीर पर हाथ रखते हुए ) नही अनामिका मै आपको आजाद तब नही करूगी 
जब तक मेरा मकसद पुरा नही हो जाता 
ऐसे ही रहोगी तुम ऐसे ही रहोगी
 
 
एक काम करती हु तुम्हे तस्वीर  से बाहर निकाल लेती हू
सामने रहोगी मेरे दाशमिका हाथ में पानी लेकर तस्वीर पर छीट देती है)
 
दाशमिका के माँ बाप  दोनो बेहोश हो जाते हैंअनामिका को देख कर
 
अनामिका : अरे माँ पिता जी कहते हुये दोनो के पास दौड लागकर जाने लगती हैं |
 
तभी दाशमिका हाथ पकड़ लेती है|
 
तुम एक आत्मा हो आत्मा बनी रहो किसी को अपने मोह मे मत लाना समझी
 
 
अनामिका:मगर वो बेहोश हो चुके हैं|
 
 
दाशमिका :"(चिल्लाते हुए)उन्हे हम सम्भाल लेगे ,
अनामिका  हमें बताओ भार्गव कहा है "
 
अनामिका :" (खुटुक कि तरफ देखते हुवे सोचती है और मन ही मन कहती है अगर हमने भार्गव कौन है बताया तो दाश्मिका उन्हें मार देगी नहीं ",नहीं हम ऐसा नहीं होने देंगे )
और कहती है हम तो यहाँ कैद रहकर आपका रास्ता निहार रहे है इतने दिनों से "
 
दाशमिका : मुझे पता है तुम जानती हो बताओ  की भार्गव कहा है ?
 
अनामिका :भार्गव जैसे दुष्ट को मेै केसे बता सकती हु ?
वो कहा ?मुझे नही पता वो अब तक यह कही आसपास नही आया है हम कैसे बता सकते है 
 
दाशमिका:   (सोचती है )ये कैसे हो सकता है 
भार्गव अब  तक नहीं पहुँचा आप तक नामुमकिन
 
अनामिका : प्रकृति हमारे हिसाब से नहीं चलती है
(इन बातो मे रात बीत  जाती है )
ओर सुबह होती है दाशमिका काला लिवास पहनकर आती है 
 
दाशमिका : अनामिका को कहती है हम भार्गव को  
 ढुँढ कर रहेंगे अनामिका !
 
अनामिका : देखो! दाशमिका 
 
दाशमिका : श...... प. ह.
 
अनामिका :मगर 
 
दाशमिका : हम भार्गव का पता लगाकर रहेंगे 
 
अनामिका :( मन ही मन कहती है )हमारे रहते आप भार्गव का पता नहीं लगा पाओगी 
दाशमिका चली जाती हैं 
(तभी माँ आती है और अचानक अनामिका पर नजर पडती है )
 
माँ चिल्ला उठती है :(जल्दी जल्दी बोलती है )अरे बचाओ बचाओ इधर उधर दौड़ लगाती है भगवान के नाम लेती है
 
अनामिका :उड़ कर माँ का हाथ अचानक पकड़ कर कहती है रुक जाइये हमारी आप से कोई दुश्मनी नहीं है
दाश्मिका आपको कहा मिली
 
मां : हड़बड़ते हुवे और रोते हुवे,,न.. न..मिली नहीं है
हमको तो एक साधु देकर गया था दो या तीन महीने कि ही थी हमको नहीं पता ये किसकी बची है 
मै सच कहे रही हु (अपने पति कि तरफ रोते हुवे देख कर कहती है )आप कुछ बोलो ना नहीं तो ये मेरा किमा कर देगी
 
खुटुक के पिता :(डरते हु हड़वाड़ाते हुवे कहते ) ह्.. हा ये सच कह रही है।
 
मां :हम महल के लालच मै आ गये थे हा हमको नहीं चाहिए ये महल हम लोग आज ही चले जायेगे और चलो चलो कहकर बाहर जाने लगते है
           तभी दरवाजा खुद ही बंद हो जाता है
 
अनामिका कहती है :यहाँ से अब कोई नहीं जायेगा और गायब हो जाती है 
 
पिता : है भगवान कहा आकर फंस गये हमारी सहायता करो
 
खुटुक : एक जैसा अनामिका कि तस्वीर देख रहा था
 
अनामिका : खुटुक से पूछती है क्या देख रहे हो तस्वीर मै
 
खुटुक :ऐसा लगता है मेने आपको पहले कही देखा है
जैसे मै आपको जानता हु
और ऐसा लग रहा है मेने ही आपकी तस्वीर बनाई है
 
अनामिका :खुटुक कि बाते सुन कर समझ जाती है कि ये खुटुक है हम सही समझे थे
दाश्मिका से इन्हे बचना होगा
 
खुटुक :क्या हुवा आप कुछ बोल क्यों नहीं रही?
 
अनामिका :यहाँ से अलग हट जाओ
 
रात होने पर👉👉👉👉👉
 
दाश्मिका :अनामिका कि आत्मा के साथ खिलवाड़ करती है, वो अनामिका को कैद कर के रखती है, अनामिका को बहुत परेशान करती है,
 
दाश्मिका :अनामिका से कहती है हम उस महल मै कैसे जाये महल का दरवाजा कैसे खुलेगा बताओ?
 
अनामिका : गिड़गिड़ा कर कहती है हमको इतना कष्ट मत दो दाश्मिका हमको नहीं पता
 
दाश्मिका :हम महल गये थे हमारी लाख कोशिस के बाद भी दरवाजा नहीं खुला क्यों?
 
अनामिका :हम नहीं जानते 
 
सुबह होती है और...
👪👪👪👪👪👪
घर के बाकी लोग आते है 
 
मां: कहती है बेटी हम लोग यह नही रहेगे चलो 
यह से दाशमिका 
 
दाशमिका : माँ को बडे गुस्से से ओर घुर कर कहती हैं 
आज कहा है माँ.. 
अब मत कहना 
ओर हम यह से कही भी नहीं जा रहे है 
समझ जाइये माँ
माँ एक बात और इस आत्मा से भी ज्यादा खतरनाक हु मै 
तो माँ हमे जो पसंद न आये ऐसा कुछ मत करना ठीक है माँ
(अनामिका के पास आकर कहती है)
ओर आप अनामिका मुझे भार्गव चाहिये मतलब चाहिए 
वक़्त  बहुत  कम है हमारे पास 
ऐसा कह कर दाशमिका चली जाती हैं
 
अनामिका:( वही  पास खिडकी के बाहर झांकते हुये
खुद को कहती है:)
 
नियति के खेल कभी कोई नहीं बदल सकता है दशमिका तुम भार्गव को पहचान ही नहीं पाओगी चाहे वह हर वक्त तुम्हारे आसपास हो तुम हार के डर से मौत को गले लगाने की बात करती हो मगर अब ऐसा नहीं होगा हम भी आजाद होंगे और तुम्हें भी सबक देंगे
      तभी  खुटुक कहता है
खुटुक : आप बहुत शान्त है  मगर आ..आत्मा क्यो बन गई ?
अनामिका खुटुक कि तरफ देखती है
 
और कहती हैं तुम्हें जान्ना है हम आत्मा क्यो बन गये
खुटुक ने हा जानना है
 
तभी  खुटुक को चिल्लाते हुये:  खुटुक ...माँ कहती है ये बच्चा है इसे कुछ मत करना
 
अनामिका : नही हम आप लोगो को एक खुरच भी नहीं देगे 
आप हमसे न डरे
 
खुटुक : नही  नही  आपसे  ज्यादा खतरनाक नाक तो दीदी हैं हमे आपसे ज्यादा डर तो दीदी से लगने  लगा है
 
पिता : देखो हमारी समझ से बाहर है ये सब क्या हो रहा है तुम्हारा हमारी बच्चों से क्या संबंध है 
 
 
अनामिका : कहती हैं 
आप लोग जाना चाहते हैं  की ये क्या हो रहा है क्यो हो रहा है
तीनो :एक साथ कहते है हाँ...
 
यहाँ से वो  महल देख रहे हो आप लोग 
हम वही रहते थे वह हमारा महल है 
एक दिन था हम बहुत खुश थे 
बहुत खूबसूरत सा 
दिन था 
दाशमिका 
वो बहुत गुस्से 
 
मे थी
पिता :वो अरे वो तो सधा ही गुस्से मै रहती है
 
माँ :आप चुप किजिये
आप बोलिये आत्मा जी
 
अनामिका :::::हम बस ऐसे ही गुनगुना रहे थे
गाते  गाते हम  दाशमिका के कक्ष तक जा पहुँचें 
वह जाने पर दाशमिका काले  लिहाज के सिंगार
किये कोई  पुजा कर रही थी 
मैने कहा  दाशमिका ये  क्या है और ये क्या कर रही हो आप 
ये सब क्या है 
 
दाशमिका :आप बिना बुलाये बिना इजाजत के हमारे कक्ष
में कैसे आ गई 
 
अनामिका  : दाशमिका ! आप क्या कहे रही हैं आपके पास आने के लिये हमे इजाजत लेनी होगी 
 
दाशमिका : (चिल्लाते हुये कहती हैं) क्यो आई आप यह
 
अनामिका  : दाशमिका ये  कौन से चक्कर में हो आप 
 
दाशमिका : आपने यह आकर ठीक नहीं किया अनामिका 
 
अनामिका : दाशमिका आप हमारी बात का जवाब दो 
 
दाशमिका : खामोश 
 
अनामिका : (चिल्लाते हुये कहती हैं )दाशमिका !
आप को
 
तभी एक दाशी आ जाती हैं
    और 
कहती हैं
राज कुंवर भार्गव  आपको बुला रहे है महारानी 
दाशमिका की तरफ देख अनामिका चल देती हैं
 
अनामिका भार्गव कक्ष में आकर कहती हैं  : आपने हमको याद किया भार्गव 
 
भार्गव : जी याद किया है 
 
अनामिका : मगर क्यो 
 
भार्गव :इस महल में आप ही है जो हमे समझेगी भाभी जी 
अनामिका :बात  क्या है देवर जी साफ -साफ कहिये 
 
भार्गव : आपकी जो सर फिरी वो सहेली है दाशमिका 
 
अनामिका : वो हमारी सहेली होने के साथ आपकी बहन भी है 
 
भार्गव : होगी ! कल हमारे महल में उत्साह है आप तो जानती है हमारी सगाई  है 
अनामिका : हा तो 
 
भार्गव : तो कल दाशमिका महल में नही चाहिए भाभी
 
अनामिका : ये क्या कह रहे हैं आप |
आपकी बहन को आप अपनी ही सगाई में न रहने को कह रहे है भार्गव 
 
भार्गव :नही मतलब नही भाभी 
 
अनामिका : मगर भार्गव 
 
भार्गव :बस भाभी हमारी बात  खत्म हो चुकी हैं 
अब आप जा सकती है 
 
अनामिका :पलटती है अचानक दाशमिका उसे दिखती है 
बडे डारावने  तरीके से  अनामिका अचानक उसे देख चौक जाती हैं
 
अनामिका : दाशमिका आप  कब आई 
 
दाशमिका : अनामिका का जवाब न देकर 
भार्गव को मुस्कराके  ओर बडे घमंड से कहती हैं 
हम कल सगाई में रहेगे 
 
भार्गव : आपके होने न होने से कोई फर्क 
नही पडता है हमे 
दाशमिका जोर से हंसते हुये 
फर्क !
 फर्क  पडेगा भाई  बहुत फर्क पडेगा
जितना आपको फर्क पढेगा उतना किसी को नही 
पड़ेगा 
 
भार्गव :( गुस्से से दाशमिका  के पास आकर ) 
जी तो चाहता है आपको भी काल कठोरी में बन्द कर दे 
अनामिका :(चिल्लाते हुये )भार्गव! 
 
भार्गव : हम चुप है तो बस!  भाभी की वजह से 
वरना आप भी  काल कोठरी में होती 
ओर वह से चला जाता है 
 
दाशमिका : अनामिका के पास आती है और कहती  है कि भाभी अनामिका!  
अब  इस वक्त की डरावनी बाते शुरू होने वाली है  और वह से चल देती हैं 
 
अनामिका :( वह खड़े खड़े सोचती है)  ये क्या हो रहा है इस महल मै हम तुम्हारे मनसूबे कामयाब नहीं होने दे सकते दाश्मिका 
और तभी सैनिक आते है भागते हुए
 और चिल्लाते हैं
 महारानी जी महारानी जी
कठोरी मै महाराज को दौरा पड़ा हैं 
वो जोर जोर से हडबाडा कर खुद को चोट पहुँचा रहे हैं 
 
अनामिका : क्या 
ओर उनके साथ जाने लगती है 
 
महल के पण्डित: (समाने आ जाते है और अनामिका को कहते) महारानी आपका वह जाना ठीक नहीं है 
 
अनामिका : मगर पण्डित जी 
पण्डित जी: वो विद्यायो के चक्कर में है 
और कोन सा काला घेरा  आप पर डाला जाये
 
अनामिका : (पण्डित की बात काटते हुये)  हम वह जायेगे 
 
पण्डित : किन्तु महारानी ! महारानी 
अनामिका जाती है धीरे धीरे सिढियो से उतरती हैं 
वह से जेल में देखती हैं 
जैसे ही देखती है  जेल से आवाज आती हैं एक बहुत मधुर आवाज में बहुत दर्द होता है 
 
तभी जेल से आवाज आती है : आप इतनी कोमल ह्रदय की हो किंतु कठोर नही 
अनामिका  
(यहाँ सुन अनामिका आगे कदम रखती ही है )
भार्गव और दाशमिका दोड कर आते हैं और भार्गव अनामिका के समाने आकर कहते है 
 
भार्गव : नही भाभी नही !ये आप क्या करने जा रही है 
अनामिका: मगर वो 
 
भार्गव : हम जानते है भाभी हमारे भाई कितने ही बडे पागल पन में क्यो न हो  आपको देख वो कितने मधुर शान्त हो जाते हैं 
 
अनामिका: आपको ये दिखाई देता है भार्गव 
कि वो हमे देख कर मधुर शान्त हो जाते हैं 
पर ये क्यो नही देखते की वो किस तकलीफ मे है....... 
 
भार्गव :हमे दिखता है पर जब तक वो ठीक न हो जाये हम उनके पास नहीं जा सकते
 उन अपराध के जिम्मेदार कौन है ये पता चल न जाये तब तक हम भइया को महल में नही  रख सकते हैं 
 
अनामिका : हमे इस बात पर जरा भी यकीन नहीं होता कि  इन्होने कोई अपराध किया है 
देखो उन्हें 
 
भार्गव : किसी को भी देख कर उसके अपराध का पता नहीं किया जा सकता है भाभी
 
अनामिका: बिना अपराध सिध्द किसी को ऐसे कैद भी नहीं किया जाता है 
ऐसा कहे कर अनामिका आ जाती है 
जेल की तरफ देख कर  भार्गव भी आ जाते है 
 
दाशमिका : जेल कि और मुंहकर कहती हैं 
तब तक अनामिका भाभी  का जीवन है 
जब तक आप चुप रहेगे  भइया
 
कल निहारिका की सगाई है हमारे  छोटे भाई के साथ भैया
 
निहारिका जिसकी वजह से आप यह हो
 
जेल से आवाज आती हैं : तुम ठीक नहीं कर रही हो
 
दाशमिका:मै कहा कहे रही हु की मे ठीक कर रही हु अब तो कुछ ठीक होना ही नहीं है ये कह कर वह से दाशमिका आ जाती हैं 
 
अनामिका अपने कक्ष में होती हैं और वही गाना गाने लगती है जो वह सुनकर जेल से आती है
 तभी उसके देवर भार्गव आते हैं 
अनामिका भार्गव को देेेख चुुुप  हो जाती हैं  
 
भार्गव :  भाभी नीचे चलिये भोजन कर लिजिये सब आपकी राह देख रहे है 
 
अनामिका :सब ! किन सब  लोगो की बात कर रहे है आप
 
सब अभी हे कहा इस महल में ..आधा परिवार तो अपने काल कोठरी मे बंद कर रखा है
 
भार्गव: आप चलिये ये! ये जहर बाद में निकाल लिजियेगा 
 
अनामिका: आप चलो हम आ रहे हैं 
(   अनामिका भार्गव और दाश्मिका                
सब भोजन पर बैठते हैं     )
                                       
भार्गव :सब तैयारी हो चुकी हैं कल की सगाई की 
 
अनामिका  : शुभ  मू्हुर्त  क्या है कल का 
 
भार्गव : हमने कोई मुहूर्त नही निकलाया
 
निहारिका का कहना है कि वो शुभ मूहुर्त में ही 
आयेगी
 
भोजन होने पर भागर्व जाने लगते है
 
अनामिका: कल आपके काका काकी और आपके बडे भाई आ रहे है सगाई में या नही
 
भार्गव : भाभी कल ऐसे दिल दुखाने वालो का नाम भी हम नहीं लेना चाहते
तो उनका आना बहुत दुर है 
 
इतना कहकर भार्गव चला जाता है अनामिका देखती रहती हैं
 
दाशमिका : क्या हुआ आपको? क्यो उन जेल के कैदियो के लिये फडफडा रहे हो आप
 
अनामिका :वो आपका परिवार है दाशमिका
 
दाशमिका : नही वो दुश्मन है हमारे
 
अनामिका : वो नहीं आप ओर निहारिका है 
इस महल के दुश्मन
 
दाशमिका पीछे हट जाती है  और कहती हैं 
हम और निहारिका 
 
क्या आपको हकिकत का अन्दाजा हो गया है
 
अनामिका: आपकी एक एक हकीकत पता चल गया है हमे 
दाशमिका : मतलब आप
 
(आखिरकार हकीकत है दाश्मिका की )
 
अनामिका : सब कुछ पता है हमे सब कुछ
 
 दाशमिका: निहारिका  के साथ रहने की आपकीआखिर मजबुरी क्या है दाशमिका हमको बता दो
 
दाशमिका : मजबुरी नहीं खुशी है
खुशी....  (दाशमिका  चली जाती है)
 
अनामिका  :  कल का अंत बहुत खतरनाक है दाश्मिका निहारिका का
 
 हमें तो फिक्र सिर्फ आपकी है दाश्मिका
आप पर क्या बीतेगी क्योंकि आप हमारी अपनी है
 
 दाश्मिका आपने कहा था की डरावनी बातें शुरू हो गई है किंतु हमने उन डरावनी बातों का कल अंत कर देंगे उन डरावनी बातों को फैलने से पहले ही हम रोक चुके हैं कल सब बेगुन आजाद होंगे और गुनाह करने वाले सामने होंगे
 
दाशमिका रात के अन्धेरे में एक गुफा में जाती है उसे जाते देख लेते हैं वह के पण्डि वह भी पीछे चले जाते है  चोरी से 
दाशमिका  निहारिका की बाते सुनते है 
 
निहारिका :बोलो दाशमिका क्यो आई हो 
 
दाशमिका :कल के लिये 
कल क्या होने वाला है मुझे ये जाना है 
 
निहारिका :कल तुम्हारे भाई से सगाई के बाद ही मृत्यु होगी 
ओर हम करेगे उनकी मृत्यु
 
दाश्मिका :अनामिका को हमारे बारे मे भनक हो चुकी है
 
निहारिका :हम सब संभाल लेगे 
 
दाशमिका: जो जेल में बन्द है वो उनका क्या
 
निहारिका की मां कहती है  : कल दाशमिका आपका  और हमारा बदला पुरा हो जायेगा
 
दाश्मिका :अनामिका को सब पता चल चुका है             
 
निहारिका:  तुम बेफिक्र रहो दाश्मिका यह सुन दाशमिका आ जाती हैं 
    (अगली सुबह )
सब तैयारी मै व्यस्त हैं 
महफिल सझ रही हैं महल में रौनक हैं 

 महल की सजावट तो बहुत थी पर वह आने वाले सिर्फ गिनती के लोग थे 
 
अनामिका : अभी तक कोई आया क्यो नही भार्गव कोई अतिथि नजर ही नही आ रहा है 
 
भार्गव : हमने किसी को बुलाया नही है भाभी 
ये सगाई गुप्त होगी
 
हैरानी से अनामिका: क्या गुफ़्त सगाई होंगी 
मगर
 
भार्गव : आपके हर उगलते जहर में कही न कही सच्चाई थी 
भाभी ऐसा लगता है मुझे
 
यहाँ हर एक के साथ कुछ गलत हुआ है
 
आज बहुत कुछ अच्छा  होगा भाभी  और बहुत  बुरा भी हो सकता है 
 
अनामिका : हम समझे नही !
क्या बुरा!
 
निहारिका एक दुल्हन की तरह आती हैं 
  जैसे निहारिका महल में आती लाईट बन्द चालु होने लगती है महल में 
बिल्कुल इस तरह  से
निहारिका इधर उधर देखती हैं और मन ही मन की आवाज से 
दाशमिका को  कहती है 
हमारी मदद करो दाशमिका
 
दाशमिका : हम तुम्हारी यह कैसे मदद करे निहारिका| 
दाशमिका  दौड कर आती है और निहारिका कहती है 
अरे आप चलिये नई भाभी  पुजा करने के लिये आप पवित्र हो जाइये 
 
तभी भार्गव :रूकिये बहन दाशमिका 
हमारी होने वाली धर्म पत्नी यही पवित्र होगी 
निहारिका का हाथ पकड़ कर भार्गव एक गीत गाना शुरू करते हैं साथ नाचते हैं 
और अचानक महल में आग के कुछ  खेल होने लगते है और भार्गव निहारिका को  गाते गाते बन्दी बना लेते हैं और
 आग में दखेल देते हैं 
 निहारिका आग में जाने पर चीखती है चिल्लाती है और अंत में बोलकर जाती है कि मैं आऊंगी मैं आऊंगी आऊंगी देखना
 
अनामिका :भार्गव से कहती है आपने क्या किया भार्गव निहारिका को जिंदा आग में धकेल दिया क्यों
 
 
 दशमिका : यह आपने ठीक नहीं किया है भाई साह..
 अपनी अंगूठी का नगीना मुंह में निकाल कर सबको श्रापित करती है आप लोग अमावस को निहारिका के विराट स्वरूप से और उसकी चीखों से सब के सब इसी महल में मारकर कैद हो जाओगे तुम्हारी आत्मा कभी आजाद नहीं होगी तुम अनामिका एक बच्ची के रूप में यही के यही कैद हो जाओगी
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भार्गव : भाभी सब ठीक हो जाएगा 
तभी पण्डित जी कहते नही राजकुँवर 
आपने सुना नही आपकी बहन क्या कह कर गई है 
 
भार्गव : हम इस विपदा का भी जल से जल समाधान ढूँढ
लेगे 
 
अनामिका : दो  दिनो में ढुँढोगे  आप 
बस भी कीजिये पुरा राज वंश और इस राज महल को 
श्रॉपित कर दिया है आप दोनों भाइयो 
आप  ने जो श्रढियन्त रचा माना पडेगा हम ये जान गये की आपके भाई को कुछ नही हुवा है 
 
भार्गव :क्या कहे रही हैं आप भाभी 
 
अनामिका :नही......... पास न आओ! 
 दाशमिका के पति को आप  ने मारा 
आज तक हम दाशमिका को गलत समझते रहे 
आज पता चला कि उनके साथ अन्याय हुआ है 
निहारिका की माँ उनको भी आपने मारा 
और सारा दोष आपने  राजपाठ हेतु अपने भाई पर लगा दिया 
क्यो 
 
भार्गव : बस कीजिये .....भाभी  ये सच है हमने जीजा साहब को मारा है पर वो बहुत गलत इन्सान थे आप नही जानते की वो क्या करने वाले थे और निहारिका की माँ 
उन्होने भाईया को पागल करवाया है 
पण्डित जी बताईये आप
 
पण्डित  : हा ये सच कल राजकुमारी दाशमिका को और निहारिका को मैने ये सब कहते हुये देखा और सुना था 
 
अनामिका: हमको किसी पर भी भरोसा नही है  किसी पर नहीं 
आप पर भी नहीं भार्गव 
कुछ दिनो में ये महल मिट्टी मे मिलने वाला है 
उसका क्या? जो निहारिका चाहती है जिसकी जुबान दाशमिका कहकर गई है युगो- युगो  तक दाशमिका और निहारिका किसी को चैन से रहने नही देगी 
इस महल के लोगो को ही नहीं यह कि प्रजा भी सकून मे नहीं रहे सकेगी 
कुछ तो गलत  नहीं बहुत कुछ गलत हुवा है इस महल मे 
 
भार्गव :हम पर भरोसा कीजिये 
 
अनामिका :कभी नहीं आपने अभी अभी  जो एक लडकी को जिन्दा जला दिया है वो तो कोई जलाद ही कर सकता है 
आपसे डर लगने लगा है हमे,
आप इन्सान नही हो 
 
भार्गव : बस भाभी ..बस !कीजिये !
हमने ये सब भाइया के कहने पर किया है 
वो ठीक हो चुके हैं निहारिका को  खत्म करने के लिये 
हम दोनो भाइयो को ये करना पडा ये सच है
आपसे शादी करना भी भइया की मजबुरी थी क्योकि निहारिका उस दिन  आपको और आपकी छोटी बहन अवन्तिका को बली देने वाली थीं 
आपकी बहन अवन्तिका अब जीवित नही है भइया ने  
अापसे शादी की निहारिका आपका पीछा छोड दे 
वह हर अमावस्या को दो लडकियो की बली देती है 
उनके लिये शिकार आपकी सहेली हमारी बहन दाशमिका ढुढती  है और वह तक ले जाती है 
 
अनामिका : हमारी शादी मजबूरी मे हुई 
क्या कहा आपने 
 
 
भार्गव : भाभी भइया को दाशमिका मजबूर किये हुये थी क्योकि 
हमारे माता पिता का पता उन्हें पता था उन दोनो को कैद में रखा गया था मगर उन्हें भी मार दिया गया  और आपको भी मार देने की धमकी उन्हें दी गई थी 
भइया मजबूर थे वो सब की जिन्दगी बचाना चाहते थे 
हमारी बातो पर यकीन कीजिये 
 
अनामिका : हमने सोच लिया है इसे पहले की दाशमिका एक आत्मा बने और हम एक बच्ची में बदले 
निहारिका दाशमिका के इस 
 खेल को हम पलट कर रख देगे 
 
पण्डित : आप क्या कहना चाहती है 
 
अनामिका :हमे माफ करना मगर हमारे पास बस यही एक रास्ता बचा है जिसे वो दोनो कुछ न कर पाये
 अनामिका चिल्लाते हुए कहती की हम 
 उन स्थापित करते कि जब तक  श्रापित करते है जब तक हम दुसरा जन्म न ले तब तक 
दाशमिका एक बच्ची की तरह रहेगी और हमें आजाद करेगी और निहारिका इसी महल मे कैद
और जब तक हम जिन्दा इस महल मे नहीं आएंगे तब तक इस महल का दरवाजा नहीं खुलेगा 
 निहारिका की हर आवाज सिर्फ हम सुनेगे  निहारिका कभी किसी को सता नही पायेगी 
दाशमिका जब तक कोई जिन्दा रहेगी वो कोई जादू टोने को नही कर पायेगी जब तक भार्गव अपने पूर्व जन्म मै  खुद  निहारिका के पास लोटकर उसकी आत्मा को मुक्ती न दे और हमारी मुक्ति दाशमिका के हाथो ही होगी जब तक हमारी मुक्ती नही होगी दाशमिका बच्ची बन इस महल से दूर रहेगी कर रहेगी 
इसी के साथ हम अपना आत्म दहन करते हैं..
  
भार्गव: भाभी....  ...........
 
अनामिका : खबर दार
 
 
और मै आग में कूद गई 
 
अनामिका : और आज हम आत्मा बने हुये है हमारे मरने पर 
पण्डित ने हमको भी श्रापित किया की हमारी आत्मा उस महल में कभी नहीं जायेगी हम उस महल मे तभी प्रवेश कर
पायेगे जब हम दुसरा जन्म नही लेलेते 
 
खुटुक : मगर पण्डित ने आपको श्रापित क्यो किया
 
अनामिका : क्योकि निहारिका  वह हमारी आत्मा को
कोई कष्ट न दे पाये 
 
खुटुक :ओर जेल में रहे राजा ओर भार्गव 
वो सब ......!
 
अनामिका: उनके साथ क्या हुवा हमको नहीं पता
 
माँ :इसका मतलब दाश्मिका एक खतरनाक तांत्रिक है
 
चिल्लाते हुवे दाश्मिका आती है
 
दाशमिका .....अनामिका ...........
 
भार्गव कहा है अनामिका बताओ 
भार्गव महल मै है 
 
अनामिका :उन दोनो भाइयों न यहाँ प्रण  लिया था कि जब तक हम इस दुनियां मे जन्म न लेकर आये तब तक उनका  जन्म न हो 
ओर इस बात का आशीर्वाद दिया गया है  हमारे कुल गुरू 
के द्वारा 
दाशमिका : नही  नही...................... 
ये नही हो सकता 
हम तुम्हें जिन्दा नही छोडेगे 
 
अनामिका :तुम्हारी मौत करीब है दाशमिका 
 
दाशमिका :आप हमे मारेगी 
 
अनामिका :नही वक्त तुम्हें मारेगा 
 
दाशमिका : गुस्से मे अनामिका की तस्वीर पर आग लगा देती हैं 
 
अनामिका :तस्वीर जलाने से तुम्हारा ओर निहारिका का वक्त तो नही बदलेगा दाशमिका 
 
दाशमिक : क्या कहा तुमने निहारिका 
अरे मै कैसे भुल गई मुझको निहारिका की आत्मा को महल
की कैद से आजाद करना है फिर वो तुम से निपटेगी अनामिका 
तुम्हें अब कोई नही बचायेगा क्योंकि
 
अनामिका : मुस्कराते हुये कहती है की 
तुमने हमको आजाद कर दिया है दाशमिका वो तस्वीर जल रही हैं  तुमने खुद कि मौत ओर हमारी आजादी दोनो ही कर दी अन्जाने में सही पर अापने हमको आजाद कर दिया 
 
खुटुक : आप चली जायेगी क्या 
 
अनामिका :मुस्कराते हुये कहती है हा पर हम फिर से आयेगे निहारिका को हमारा और दाशमिका का इन्तजार है 
निहारिका के लिये हमे आना है उस महल को उस वंश श्रॉप
मुक्ती हेतु आना है 
इतना बोल अनामिका हवा मे कही गुम होकर चली जाती हैं 
दाशमिका बहुत बुढी हो जाती हैं और जलने लगती हैं ओर
चिल्लाती है  नही ...नहीं नही 
 
खुटुक : हम आप दोनो का इन्तजार करेगे |
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खुटुक :मां दीदी आपको कैसे मिली थी
 
मां : यह वक्त नहीं है बात करने का सुबह बात करते हैं
 अगली सुबह एक महात्मा जी दरवाजा बजाते हैं
 दरवाजा खुटुक खोलता है और कहता है जी बोलिए आप कौन
 
महात्मा: बेटा अपने माता-पिता को बुलाओ
 
खुटुक : मां मां पापा पापा जल्दी आइये आपसे कोई मिलने आया है
 
खुटुक के पिता जी कहिये : जी कहिए
 
महात्मा: मुझे गुरुदेव श्री मंत प्रणदेव आचार्य गुरुदेव ने भेजा है
 
खुटुक के पिता : क्या आपको उन्होंने भेजा है मुझे उनसे मिलना है अभी के अभी क्या मैं उनसे मिल सकता हूं जो बच्ची उन्होंने हमको दी थी
 
 महात्मा: जी हां उन्होंने ही संदेश भेजा है की आप दाश्मिका का सारा सामान एक कमरे में भरकर कैद कर दें उसकी कोई भी वस्तु बाहर नहीं होना चाहिए और उसे दरवाजे के सामने अपने घर का मंदिर बना ले  ,और उन्हें यहां पता है कि यहां क्या-क्या हुआ है
 
खुटुक के पिता : जैसी  गुरुदेव की आज्ञा
 
 महात्मा: ठीक है मैं चलता हूं
 
खुटुक : अनामिका की तस्वीर बनता है
 
और उसे छिपा कर रखता है एक तरफ उसी गांव में अनामिका और दशमीका जन्म ले लेती है 
पहले दाशिमका का जन्म होता है बहुत मुस्कराती हुई एक चचंल लडकी की तरह 
वही दुसरी और अनामिका का जन्म होता है बहुत रोते हुए  वो एक मीनिट तो ठीक एक सेकंड भी चुप नही रहती बहुत रोती है बहुत रोती है उसके माँ बाप बहुत परेशान रहते हैं 
उसकी माँ भी बहुत रोती हैं और कहती हे 
मेरी बच्ची तो चुप नही रहती मै क्या करू भगवान 24 घन्टे से एक सी रो रही है 
सब इस बात से हैरान है कि क्या करे 
 
अनामिका के पिता : हम खुद भी परेशान है समझ नहीं आ रहा है 
24 घन्टे से रोती अपनी बच्ची का दुख उसकी माँ छेल नही पा रही थी और 
 
अनामिका की माँ गिर जाती और वह वही मर जाती हैं 
उसके पिता अनामिका को चिकित्सा में  छोड कर अपनी मरी पत्नी का अन्तिम संस्कार करने जाता है 
वह से आने के बाद अनामिका के  पिता अनामिका को लेकर घर आते  है 
 
अनामिका के पिता: क्याकरूं.... समझ नहीं पा रहा हूँ ये तो बिल्कुल चुप ही नही रहे रही है 
हे भगवान मै क्या करूं सब कुछ कर के देख लिया 
 तीन दिन हो गये हैं रोते रोते इसे हे  ईश्वर मे इसकी कैसे परवरिश करू 
 
आखिर क्यों ये बच्ची इतनी रो रही है क्या इसकी वज़ह है 
रोती बच्ची को रोते रोते ले जाते हुये भगवान से कहते हुये जाता की हे भगवान मुझे माफ करना  जैसे वह एक ही सीढी मन्दिर की चढता है और अनामिका चुप हो जाती है 
 
अनामिका के पिता : हैरानी से अनामिका की और देखते हैं अरे मेरी बच्ची चुप हो गई 
 
हे भगवान तेरा लाख लाख सुक्रिया और मन्दिर मे भगवान के दर्शन कर वह मन्दिर से बाहर आता है 
ओर फिर अनामिका रोने लगती हैं 
 
अनामिका के पिता :सीढी चढता हु  तो ये चुप हो जाती और उतरता हु तो रोने लगती है हे प्रभु ये कैसी माया है आपकी भगवन 
 
दुसरी और दाशमिका के माता पिता दाशमिका को लेकर आते है और जैसे ही दाशमिका को लेकर मन्दिर की सीढ़ी पर चढ़ते है वैसे ही वह रोने लगती हैं 
वही खडे यह घटना एक सन्त देख रहे थे 
 
 तभी वही अनामिका के पिता अनामिका  को मन्दिर में उसी सन्त के पास लाकर लेटा कर कहते है बाबा में कुछ देर में आया आप मेरी बच्ची का ध्यान रखे 
 
सन्त :रूको कुछ देर बाद जाना
 
अनामिका के पिता : नही बाबा कुछ देर मे आता हूँ बच्ची बहुत भुखी है 
 
वह कुछ सुने बिना ही चला गया और उसके साथ एक हादसा हो गया जिसे उसकी मौत हो गई 
अनामिका उस बाबा के पास रहे गई 
बाबा ने अनामिका के सर पर हाथ रखा और आँखे बन्द की तो उन्होने उसका अतीत देखा वह देख सब बाबा हैरानी मे आ गया
हे भगवान 
इस बच्ची का क्या होगा 
इसका जीवन तो भुत्तो प्रेतो सेे भरा है 
अपने गले से एक माला निकाल कर अनामिका के गले मे डाल कर 
हे ईश्वर इसकी रक्षा करना 
 
वही दाशमिका की माँ कहती है :बाबा अब इस बच्ची का क्या होगा 
 
तभी दाशमिक के पिता कहते है: ये बच्ची हमारे घर चलेगी 
हमारे साथ रहेगी
 
तभी बाबा : यह बच्ची के गले में माला है तब तक यह कभी नहीं रोयेगी और इसे कोई विपदा नही छु पायेगी
दाशमिका की माँ : बाबा ये हमारी बेटी है जब से मन्दिर आये हैं रोये जा रही हैं तभी वह उसे भी एक माला देते हैं मगर गले मे जाते ही वह दाशमिका को घाव दे देती हैं
 
तभी बाबा कहते :   इन दोनो का भविष्य एक दुसरे से जुडा हुआ है और रही इसके इस घाव की बात तो जब तक ये घाव इसपर रहेगे ये हर भुरी संगति से बची रहेगी 
जिस दिन इसके घाव साफ  हुये उस दिन ये बच्ची सब के लिये बहुत खतरनाक होगी 
 
दाश्मिका की माँ : मेरी बच्ची पर इतने सारे घाव में सहन नहीं कर सकती
 
बाबा : आपकी बेटी  घाव से मंदिर में रो नहीं रही है यह भी तो देखिए
//////////////////////////////////////////////////////////////////आखिर क्यों रोती थी अनामिका इतना ?
मंदिर के अंदर दाश्मिका क्यों रोने लगी ?
अनामिका का विवाह किस मज़बूरी से हुवा?
पूरा परिवार क्यों रहा कैद मे? निहारिका को क्यों जिन्दा जलाया गया ?
 
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