मेरे कुछ अल्फ़ाज
दिल से निकले अल्फ़ाज है मेरे,
पर ये रोज के है |
तुम भावुक न होना ,
कुछ अपने आप के है ,
कुछ परायो के है |
जीवन की कहानी बडी हो सकती हैं, पर छोटी मौत होते खत्म भी हो जाती हैं|
जो मै आपको सुनाती हु ,ये तो रोज नये - नये मोड की होनी है| कुछ दिल के हालत की होनी,तो कुछ सुन्दर पलो की होनी है |
कुछ को तो कुछ न होने का घमंड भी होता है|
ये रोज लिखी जाने वाली बाते होगी ,
दर्पण की तरह तुम से भी मेल खानी होगी |
जाने कितनी तरह की सुगन्ध है , कुछ खाने की
कुछ महकती फुलो की खुशबू है, सुगन्ध मेरा नाम भी है ,
ये सुगन्ध थी, मगर अब गन्ध मे बदल गई है |
शुरू होगा अब ये सफर
कुछ न होने के घमंड मे,
नफ़रत में मिलकर,
सुगन्ध का गन्ध के सफर में
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कितनी बडी दुनिया है लोगो की नही
हमारे सपनो की तुम्हारे सपनो की
सुगन्ध की
सुगन्ध के अल्फ़ाज थोडे नही बहुत कडवे है, तुम पड़ना तो शुरू करो बडे अजीबो गरीब हे |
सुगन्ध के पास सबकुछ है ,
पर फिर भी वह उलझन मैं है,
की वो खुश है या दुःख में है !

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