भाग दो डरावनी बातो से बनती रही आत्माये

चलो  एक अच्छा सा पहले  गीत हो जाये जिसे की दिल खुश हो जाये 

भाग एक पढने के बाद आईये भाग दो मे मनोरंजन करते इसमे पढना तो पढेगा मगर कुछ अलग तरीके से आइये ,
पहले दाशिमका का जन्म होता है बहुत मुस्कराती हुई एक चचंल लडकी की तरह 
वही दुसरी और अनामिका का जन्म होता है बहुत रोते हुए  वो एक मीनिट तो ठीक एक सेकंड भी चुप नही रहती बहुत रोती है बहुत रोती है उसके माँ बाप बहुत परेशान रहते हैं 
उसकी माँ भी बहुत रोती हैं और कहती हे 
मेरी बच्ची तो चुप नही रहती मै क्या करू भगवान 24 घन्टे से एक सी रो रही है 
सब इस बात से हैरान है कि क्या करे 
अनामिका के पिता : हम खुद भी परेशान है समझ नहीं आ रहा है 
24 घन्टे से रोती अपनी बच्ची का दुख उसकी माँ छेल नही पा रही थी और 
अनामिका की माँ गिर जाती और वह वही मर जाती हैं 
उसके पिता अनामिका को चिकित्सा में  छोड कर अपनी मरी पत्नी का अन्तिम संस्कार करने जाता है 
वह से आने के बाद अनामिका के  पिता अनामिका को लेकर घर आते  है 
अनामिका के पिता: क्याकरूं.... समझ नहीं पा रहा हूँ ये तो बिल्कल चुप ही नही रहे रही है 
हे भगवान मै क्या करूं सब कुछ कर के देख लिया 
 बता दिया तीन दिन हो गये हैं रोते रोते इसे हे  ईश्वर मे इसे कैसे पालूँगा कैसे 
और वह उस बच्ची को मन्दिर में छोडने के लिये चल पडता है 
रोती बच्ची को रोते रोते ले जाते हुये भगवान से कहते हुये जाता की हे भगवान मुझे माफ करना मुझे माफ करना जैसे वह एक ही सीढी मन्दिर की  चढता है और अनामिका चुप हो जाती है 
 अनामिका के पिता : हैरानी से अनामिका की और देखते हैं अरे मेरी बच्ची चुप हो गई 
हे भगवान तेरा लाख लाख सुक्रिया और मन्दिर मे भगवान के दर्शन कर वह मन्दिर से बाहर आता है 
ओर फिर अनामिका रोने लगती हैं 
अनामिका के पिता :सीढी चढता हु  तो ये चुप हो जाती और उतरता हु तो रोने लगती है हे प्रभु ये कैसी माया है आपकी भगवन 
दुसरी और दाशमिका के माता पिता दाशमिका को लेकर आते है और जैसे ही दाशमिका को लेकर मन्दिर की सीढ़ी पर चढ़ते है वैसे ही वह रोने लगती हैं 
वही खडे यह घटना एक सन्त देख रहे थे 
 तभी वही अनामिका के पिता अनामिका  को मन्दिर में उसी सन्त के पास लाकर लेटा कर कहते है बाबा में कुछ पलो में आया आप मेरी बच्ची का ध्यान रखे 
सन्त :रूको कुछ देर बाद जाना
अनामिका के पिता : नही बाबा कुछ देर मे आता हूँ बच्ची बहुत भुखी है 
वह कुछ सुने बिना ही चला गया और उसके साथ एक हादसा हो गया जिसे उसकी मौत हो गई 
अनामिका उस बाबा के पास रहे गई 
बाबा ने अनामिका के सर पर हाथ रखा और आँखे बन्द की तो उन्होने कुछ ऐसा देखा 
वह देख सब बाबा हैरानी मे आ गया
हे भगवान 
इस बच्ची का क्या होगा 
इसका जीवन तो भुत्तो प्रेतो सेे भरा है 
अपने गले से एक माला निकाल कर अनामिका के गले डाल कर 
हे ईश्वर इसकी रक्षा करना 
वही दाशमिका की माँ कहती है :बाबा अब इस बच्ची का क्या होगा 
तभी दाशमिक के पिता कहते है: ये बच्ची हमारे घर चलेगी 
हमारे साथ रहेगी
तभी बाबा : यह बच्ची के गले में माला है तब तक यह कभी नहीं रोयेगी और इसे कोई विपदा नही छु पायेगी
दाशमिका की माँ : बाबा ये हमारी बेटी है जब से मन्दिर आये हैं रोये जा रही हैं तभी वह उसे भी एक माला देते हैं मगर गले मे जाते ही वह दाशमिका को घाव दे देती हैं
तभी बाबा कहते :   इन दोनो का भविष्य एक दुसरे से जुडा हुआ है और रही इसके इस घाव की बात तो जब तक ये घाव इसपर रहेगे ये हर भुरी संगति से बची रहेगी 
जिस दिन इसके घाव साफ  हुये उस दिन ये बच्ची सब के लिये बहुत खतरनाक होगी 

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